ईयू और भारत के बीच तेजी से बढ़ रहा व्यापारिक संबंध, लोगों को मिले रोजगार के अवसर


नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ (ईयू) और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में लगातार विकास देखने को मिल रहा है। हाल ही में फेडरेशन ऑफ यूरोपियन बिजनेस इन इंडिया (एफईबीआई) की दूसरी वार्षिक आम बैठक में भारत में ईयू के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि एफईबीआई ने अपने पहले साल में ही महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

बता दें कि फेबी का आधिकारिक तौर पर 11 अक्टूबर 2024 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में उद्घाटन हुआ था।

एफईबीआई के अध्यक्ष रेमी मैलार्ड ने एक साल बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब उनकी जगह पर नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी। ईयू राजदूत हर्वे डेल्फिन ने रेमी को बधाई देते हुए कहा कि आपकी दूरदर्शिता, समर्पण और दृढ़ संकल्प के बिना फेबी की सफलता संभव नहीं होती। फेबी भारत में आपकी स्थायी विरासत रहेगी। मैं फेबी सचिवालय (महासचिव सोनिया पराशर के नेतृत्व में) को उनके उत्कृष्ट संगठनात्मक कौशल और कड़ी मेहनत के लिए भी धन्यवाद देना चाहता हूं। मुझे विश्वास है कि अपनी ऊर्जा, रचनात्मकता और उद्देश्य की भावना से आप फेबी की कहानी में एक नया सफल अध्याय लिखेंगे।

बता दें कि फेबी की स्थापना के बाद से ही यूरोपीय व्यवसाय मजबूती से उभर रहे हैं। एफईबीआई में 160 से अधिक सदस्य कंपनियां हैं, जो भारत में यूरोपीय व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करती हैं। ईयू राजदूत ने बताया कि भारत में हाल ही में यूरोपीय संघ के व्यापार को लेकर एक सर्वे किया गया।

इस सर्वे में पता चला है कि भारत में लगभग 6,000 यूरोपीय संघ की कंपनियां हैं, जिनकी संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। ये कंपनियां उत्तर में जम्मू-कश्मीर से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु तक और पश्चिम में गुजरात से लेकर पूर्व में असम तक लगभग हर भारतीय राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद हैं।

सर्वे के अनुसार यूरोपीय संघ की कंपनियों ने भारत में 30 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। ये रोजगार उच्च-गुणवत्ता और अच्छी तनख्वाह वाली हैं। इसके साथ ही लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हुए। 2024 में, भारत में यूरोपीय संघ की कंपनियों ने कुल 186 अरब यूरो का कारोबार किया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 5 प्रतिशत है।

यूरोपीय संघ की कंपनियों ने 23.5 अरब यूरो मूल्य के सामान का निर्यात किया, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 6 प्रतिशत है। उन्होंने 7 अरब यूरो से ज्यादा कर भी चुकाया। ये आंकड़े भारतीय कर्मचारियों, परिवारों, समाज और अर्थव्यवस्था, सभी के लिए वास्तविक लाभ दर्शाते हैं।

एफईबीआई और भारत में यूरोपीय व्यापार का पूरा समुदाय भारत के विकास के साथ-साथ यूरोपीय संघ-भारत साझेदारी का हिस्सा है। यूरोपीय संघ के व्यवसाय भारत को एक आकर्षक बाजार के रूप में देखते हैं। भारत के बाजार को यूरोपीय संघ के व्यवसाय गंभीर चुनौतियों के साथ ही बड़े अवसरों की तरह देखते हैं। यही कारण है कि यूरोपीय संघ की कंपनियां यहां के बाजार में निवेश कर रही हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रही हैं। इन कंपनियों के जरिए भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यूरोपीय कंपनियां भारत के ‘मेक इन इंडिया’ विचार को आगे बढ़ा रही हैं।

— आईएएनएस

कनक/डीएससी


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