झारखंड : प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने बदली हजारीबाग के तेतरिया गांव की तस्वीर


हजारीबाग, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाय) ने झारखंड के हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड के तेतरिया गांव की दशा और दिशा पूरी तरह बदल दी है।

दशकों तक जर्जर सड़कों के कारण उपेक्षित रहे इस गांव को अब पक्की सड़क ने नई जिंदगी दी है। इस सड़क के निर्माण से न केवल तेतरिया, बल्कि आसपास के आधा दर्जन गांवों के निवासियों के जीवन में भी व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

पहले तेतरिया गांव तक पहुंचना किसी बड़े संघर्ष से कम नहीं था। बारिश के मौसम में सड़क की हालत इतनी खराब हो जाती थी कि आवागमन लगभग ठप पड़ जाता था।

ग्रामीणों को ब्लॉक कार्यालय, अस्पताल या बाजार तक पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती थी। शाम ढलने के बाद गांव सुनसान हो जाता था और लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते थे। अब पीएमजीएसवाय के तहत बनी पक्की सड़क ने इन सभी समस्याओं को दूर कर दिया है।

गांव के निवासी रविशंकर कुमार ने बताया, “पहले सड़क की हालत इतनी खराब थी कि लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना बेहद कठिन था। अब सड़क बनने से हम आसानी से शहर और ब्लॉक कार्यालय से जुड़ गए हैं। यह बदलाव प्रधानमंत्री मोदी की इस योजना की देन है।”

इसी तरह गांव के एक अन्य निवासी आशीष सोनी ने कहा, “वर्षों तक तेतरिया तक पहुंचना एक चुनौती थी। बारिश में तो हालात और बदतर हो जाते थे। लेकिन, अब इस नई सड़क ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है। लोग कम समय में एक जगह से दूसरी जगह पहुंच पा रहे हैं। हम प्रधानमंत्री मोदी के आभारी हैं कि उनकी इस योजना ने हमारे गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा।”

गांव की मुखिया अनीता देवी ने भी इस योजना की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “यह सड़क तेतरिया के विकास की राह खोलने वाली साबित हुई है। बच्चों को स्कूल जाने, किसानों को बाजार पहुंचने और महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में अब कोई दिक्कत नहीं होती। यह सब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की वजह से संभव हुआ है। इस सड़क ने न केवल आवागमन को सुगम बनाया है, बल्कि गांव की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को भी गति दी है। ग्रामीण लोग अब आत्मविश्वास के साथ शहरों से जुड़ रहे हैं और अपनी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रहे हैं।”

–आईएएनएस

एकेएस/एबीएम


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