एस बद्रीनाथ : घरेलू सर्किट का बड़ा सितारा जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पूरी तरह नहीं चमक नहीं सका


नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। साल था 2008, भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका दौरे पर जा रही थी। सचिन तेंदुलकर उस सीरीज का हिस्सा नहीं थे। टीम इंडिया को उनकी जगह एक बल्लेबाज की जरूरत थी। उस समय दिलीप वेंगसरकर मुख्य चयनकर्ता थे। उनके पास एस बद्रीनाथ और विराट कोहली के रूप में दो विकल्प थे। वेंगसरकर ने कोहली को मौका दिया। उनके इस फैसले ने भारतीय क्रिकेट को नए तरीके से परिभाषित किया।

दिलीप वेंगसरकर 2008 में हुए अंडर-19 विश्व कप में विराट कोहली के प्रदर्शन से प्रभावित थे। इसी वजह से कप्तान एमएस धोनी और तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अध्यक्ष श्रीनिवासन के एस बद्रीनाथ के पक्ष में होने के बावजूद उन्होंने विराट को मौका दिया। विराट पर उनके विश्वास ने विश्व क्रिकेट को एक महान खिलाड़ी दे दिया था।

हालांकि, विराट को ड्रॉप कर उसी सीरीज में एस बद्रीनाथ को भी मौका दिया गया, लेकिन वह उस मौके और बाद में मिले मौकों को भुना नहीं पाए और धीरे-धीरे राष्ट्रीय टीम में उनकी चयन की संभावना समाप्त हो गई। वहीं, उसी दौर में लगातार रन बनाते हुए विराट ने अपनी जगह तीनों फॉर्मेट में पक्की कर ली।

एस बद्रीनाथ को भारत की तरफ से तीनों फॉर्मेट में खेलने का मौका मिला। उन्होंने 2 टेस्ट, 7 वनडे और 1 टी20 खेले। 2011 के बाद उन्हें कभी राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिला। वह आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा थे।

बद्रीनाथ को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता नहीं मिली, लेकिन उनका नाम घरेलू क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाजों में शुमार है। तमिलनाडु का यह खिलाड़ी अपने करियर के दौरान मध्यक्रम के दिग्गज बल्लेबाज के रूप में स्थापित था।

145 प्रथम श्रेणी मैचों में 32 शतक और 45 अर्धशतक लगाते हुए उन्होंने 10,245 रन बनाए। वहीं, 144 प्रथम श्रेणी मैचों में 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाते हुए 4,164 रन बनाए।

30 अगस्त 1980 को चेन्नई में जन्मे बद्रीनाथ ने 28 साल की उम्र में भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया था। अगस्त 2018 को उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी थी।

बद्रीनाथ उन खिलाड़ियों में शामिल रहे जिनके पास अपार संभावनाएं और तमाम तरह के शॉट्स थे। उनकी तकनीक भी शानदार थी और मैदान पर उनकी चपलता भी देखते ही बनती थी। हालांकि, उनका आगमन ऐसे समय में हुआ जब भारतीय क्रिकेट में प्रतिद्वंदिता भी चरम पर थी। बद्रीनाथ सीमित मौकों को भले ही पूरी तरह से नहीं भुना पाए, लेकिन क्रिकेट के गलियारों में आज भी उनको एक बेजोड़ बल्लेबाज के तौर पर याद किया जाता है।

–आईएएनएस

पीएके/एएस


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