ट्रेड टैरिफ चुनौतियों के बावजूद भारतीय स्टार्टअप का भविष्य सुरक्षित: फाउंडर्स

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। ‘स्टार्टअप महाकुंभ’ इवेंट में उद्योग जगत के टॉप लीडर्स ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की स्टार्टअप कहानी मजबूत और आशाजनक बनी हुई है।
पेटीएम के सीईओ और संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने कहा कि हाल ही में अमेरिका द्वारा टैरिफ घोषणाओं के कारण घरेलू स्टार्टअप इकोसिस्टम पर कुछ दबाव महसूस हो सकता है, लेकिन इसका असर अल्पकालिक रहने की उम्मीद है। इस तरह की वैश्विक घटनाएं अस्थायी रूप से फंडिंग गतिविधि को धीमा कर सकती हैं, लेकिन भारतीय स्टार्टअप के मुख्य संचालन अप्रभावित रहते हैं क्योंकि वे मुख्य रूप से घरेलू बाजार पर आधारित हैं।
उन्होंने कार्यक्रम में कहा, “इससे एक परेशान करने वाला कारोबारी माहौल बन सकता है, जो स्टार्टअप फंडिंग पर सीमाएं लगा सकता है। लेकिन भारतीय स्टार्टअप बड़े पैमाने पर एक बाजार के रूप में भारत पर केंद्रित हैं, इसलिए टैरिफ से सीधे प्रभावित नहीं होते हैं।”
उन्होंने स्वीकार किया कि बड़े वैश्विक घटनाक्रमों का अक्सर ‘डोमिनो इफेक्ट’ पड़ता है, खासकर निवेशकों की भावना पर इसका प्रभाव पड़ता है। हालांकि, शर्मा ने कहा कि फंडिंग अल्पावधि में प्रभावित हो सकती है, लेकिन स्टार्टअप की दुनिया में अवसर दीर्घकालिक बने रहेंगे।
यह कहते हुए कि ‘पैसा हमेशा वापस आ जाता है’, उन्होंने भारतीय उद्यमियों को अपने दृष्टिकोण पर दोबारा विचार करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर बल दिया।
स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए सरकार के समर्थन पर टिप्पणी करते हुए, शर्मा ने भारत को वैश्विक स्टार्टअप हब बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास पर संतोष व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि भारत विदेशी निवेश आकर्षित कर रहा है और एक आत्मनिर्भर टेक्नोलॉजी पावरहाउस बनने की दिशा में सही रास्ते पर है।
विंनजो के को-फाउंडर पवन नंदा ने भारत की गेमिंग इंडस्ट्री के तेजी से होते विकास पर प्रकाश डाला।
नंदा ने कहा, “भारतीय गेमिंग स्टार्टअप वैश्विक बाजारों में एक सांस्कृतिक उपस्थिति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।” उन्होंने कहा कि गेमिंग भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के भविष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नंदा ने कहा, “यदि आप भारत में गेमिंग इंडस्ट्री के वर्तमान आकार को देखें तो इसकी एक बड़ी क्षमता को देख सकेंगे, घरेलू खपत ही लगभग साढ़े तीन बिलियन डॉलर है।”
उन्होंने कहा कि 2029-30 तक यह बढ़कर 9.1 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच जाएगा, जिसका मतलब है कि अगले पांच सालों में यह सेक्टर करीब तीन गुना बढ़ जाएगा।
–आईएएनएस
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