वित्त वर्ष 24 में एटेरो का मुनाफा 31 प्रतिशत गिरा; आय 1,000 करोड़ रुपये के पार


नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस) इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट रीसाइक्लिंग स्टार्टअप एटेरो के शुद्ध मुनाफे में वित्त वर्ष 24 में 31 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इसकी वजह कंपनी के खर्च में इजाफा होना है।

कंपनी का शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 23 में 21 करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 24 में 14.5 करोड़ रुपये रह गया। इसकी वजह कंपनी की मटेरियल लागत में इजाफा होना है।

वित्त वर्ष 2024 में एटेरो के कुल खर्च में मटेरियल लागत की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत थी। यह वित्त वर्ष 24 में 63.5 प्रतिशत बढ़कर 363 करोड़ रुपये हो गई है।

वित्त वर्ष 2024 में एटेरो का कर्मचारी खर्च 16.7 प्रतिशत बढ़कर 14 करोड़ रुपये हो गया, जबकि कानूनी शुल्क खर्च 66.7 प्रतिशत बढ़कर 10 करोड़ रुपये हो गया।

मैनपावर और सामान्य व्यय सहित अन्य लागत 31 करोड़ रुपये रही। इन सभी को मिलाकर एटेरो का कुल खर्च वित्त वर्ष 24 में सालाना आधार पर 51.6 प्रतिशत बढ़कर 426 करोड़ रुपये हो गया, जो कि वित्त वर्ष 23 में 281 करोड़ रुपये था।

वित्त वर्ष 24 में कंपनी का आरओसीई 19.32 प्रतिशत रहा, जबकि इसका ईबीआईटीडीए मार्जिन 8.41 प्रतिशत रहा।

वित्त वर्ष 24 के दौरान एटेरो ने एक रुपया कमाने के लिए 0.96 रुपये खर्च किए।

वित्त वर्ष 24 में कंपनी की आय में सालाना आधार पर 54 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है।

एटेरो के सीईओ और सह-संस्थापक नितिन गुप्ता ने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 24 से वित्त वर्ष 25 के बीच 125 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर हासिल की है और कंपनी की आय 1,000 करोड़ रुपये को पार कर गई है।

कंपनी के वित्तीय विवरण के अनुसार, एटेरो की ऑपरेशनल आय वित्त वर्ष 24 में बढ़कर 446 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 23 में 289 करोड़ रुपये थी।

पेटेंट तकनीक का उपयोग करके ई-कचरे और लिथियम-आयन बैटरियों को रिसाइकिल करने में विशेषज्ञता रखने वाली यह कंपनी अपनी अधिकांश आय रिसाइकिल की गई धातुओं और बैटरी-ग्रेड सामग्रियों को बेचकर अर्जित करती है।

वित्त वर्ष 24 में कंपनी के कुल राजस्व का 75 प्रतिशत उत्पाद बिक्री से आया था, जबकि शेष आय ई-कचरा रिसाइक्लिंग, लिथियम-आयन बैटरी प्रोसेसिंग और सिक्योर डेटा डिस्ट्रक्शन जैसी सेवाओं से आई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रुड़की में मुख्यालय वाली एटेरो ने अब तक कुल 31 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इसके प्रमुख निवेशकों में एनईए-इंडो यूएस वेंचर (34.74 प्रतिशत), डीएफजे मॉरीशस (23.54 प्रतिशत) और जीएचआईओएफ (9.47 प्रतिशत) शामिल हैं।

-आईएएनएस

एबीएस/


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