एमएसएमई सेक्टर को सपोर्ट की जरूरत, नए अल्टरनेटिव बाजारों की तलाश करनी होगी : पीएचडीसीसीआई सीईओ

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ एक बड़ा संकट है, हालांकि इस तरह के टैरिफ को लेकर आशंकाएं पहले से ही की जा रही थीं। दीर्घावधि में इस स्थिति के सामान्य होने की उम्मीद है। अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ पर यह बयान पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सीईओ रंजीत मेहता ने गुरुवार को दिया।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के सीईओ रंजीत मेहता ने कहा, “अगर आप पूरी स्थिति को देखेंगे तो पाएंगे कि इस तरह का टैरिफ लगाया जाना इतिहास में पहली बार है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक अमेरिका के इस कदम का वैश्विक व्यापार पर प्रभाव पड़ेगा। टैरिफ के तत्काल प्रभाव हमने स्टॉक मार्केट के साथ देखा है। दुनिया भर के स्टॉक मार्केट क्रैश हो गए।”
भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत भी इन टैरिफ से बचा नहीं है। लेकिन, अच्छी बात यह है कि वर्तमान में भारतीय दवाओं को ट्रंप प्रशासन के रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट दी गई है, जो फार्मास्युटिकल्स के लिए अच्छी खबर है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था लचीली है। साथ ही देश तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाता है। हमारे पास एक बड़ा बाजार है। हमारा उपभोग भी काफी ज्यादा है।
टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर को लेकर रंजीत मेहता ने स्वीकार किया कि इन सेक्टर के लिए अमेरिका एक बड़ा बाजार है। इन सेक्टर्स पर अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ का असर देखने को मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी अभी बातचीत चल रही है। आने वाले सितंबर से अक्टूबर तक इसे लेकर कुछ सफलता देखने को मिल सकती है। उस समय तक कुछ बड़े फैसले जरूर सामने आ सकते हैं।
उन्होंने टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर में टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “दीर्घावधि में अमेरिका के अलावा, डायवर्सिफाइड और अल्टरनेटिव बाजारों के विकल्प पर जाया जा सकता है। हमें एमएसएमई को अपना सहयोग देना होगा, उन्हें मार्केट एक्सेस देना होगा, ताकि वे नए बाजारों की ओर बढ़ सकें।”
मेहता ने एमएसएमई सेक्टर को सपोर्ट देने की बात पर जोर देते हुए कहा, “अगर हम नए बाजारों के रूप में कुछ देशों की पहचान कर लें तो यह एमएसएमई के लिए काफी राहत भरा हो सकता है। इस तरह के कदम से एमएसएमई नए बाजारों की ओर बढ़ेंगे और इस टैरिफ से कम प्रभावित होंगे। हमें सरकार के साथ बातचीत करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एमएसएमई को तत्काल फाइनेंसिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाए। हमें एमएसएमई सेक्टर को टेक्नोलॉजिकल सपोर्ट देने के बारे में विचार करना चाहिए, ताकि उनके प्रोडक्ट्स वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह से तैयार हों और अपने उत्पादों के लिए सही कीमत प्राप्त कर सकें।”
उन्होंने कहा, “मोदी सरकार और ट्रंप प्रशासन के एक-दूसरे से अच्छे रिश्ते हैं और भारत सरकार द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर काम कर रही है। इन समझौतों का परिणाम अगले 4 से 5 महीनों में देखने को मिल सकता है। भारत के पास अवसर है, पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के लिए यह सही समय है। हमें क्वालिटी प्रोडक्ट्स बनाने पर ध्यान देना चाहिए।”
मेहता ने दीर्घावधि में इस स्थिति के सामान्य होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि यह संकट का समय है, लेकिन हर किसी को सब्र बनाए रखने की जरूरत है। हमें टैरिफ को लेकर आगे की सारी बारीक जानकारियों के आने तक सब्र बनाए रखना होगा। इसके साथ ही हमें नए अल्टरनेटिव बाजारों की तलाश करनी होगी। इस परेशानी से निपटने के लिए फ्यूचर रेडी बनने और नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की जरूरत है।
–आईएएनएस
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