उद्यम पोर्टल पर 7.83 करोड़ एमएसएमई पंजीकृत, 34.50 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हुए : जीतन राम मांझी

नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। उद्यम पोर्टल पर 2020 से अब तक (28 फरवरी, 2026 तक) करीब 7.83 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पंजीकृत हुए हैं और इनसे 34.50 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। यह जानकारी केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने गुरुवार को संसद में दी।
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए मांझी ने कहा कि इस दौरान करीब 1.37 लाख एमएसएमई बंद हुए। मंत्री ने बताया कि किसी उद्यम के पंजीकरण रद्द करने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि कंपनी के मालिक में बदलाव, प्रमाण पत्र की आवश्यकता न होना, दोहरा पंजीकरण, उद्यम का बंद होना आदि।
मांझी ने बताया, “सरकार, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी योजना, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम, एमएसएमई प्रदर्शन में सुधार और उसे गति प्रदान करने वाली योजनाएं, एसआरआई फंड, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और एमएसएमई चैंपियंस योजना आदि जैसी विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतिगत पहलों के माध्यम से राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के प्रयासों में सहयोग करती है।”
ऋण उपलब्ध कराने के लिए, कोविड-19 महामारी के दौरान एमएसएमई सहित व्यवसायों के लिए 5 लाख करोड़ रुपए की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना की घोषणा की गई थी।
मंत्री ने कहा, “यह योजना 31 मार्च, 2023 तक चालू रही, जिसके तहत एमएसएमई को 1.13 करोड़ की गारंटी दी गई।”
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 23 जनवरी, 2023 की ईसीएलजीएस पर शोध रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14.6 लाख एमएसएमई खाते बचाए गए, जिनमें से लगभग 98.3 प्रतिशत खाते सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसएमई) श्रेणियों में थे।
इसके अलावा, एमएसएमई की स्थिति में सुधार होने पर 3 वर्षों के लिए गैर-कर लाभ भी दिए गए।
विशेष रूप से, आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) कोष के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपए का इक्विटी निवेश किया गया है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 10,000 करोड़ रुपए और निजी इक्विटी/वेंचर कैपिटल फंडों द्वारा 40,000 करोड़ रुपए का प्रावधान है।
इस योजना का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र की योग्य और पात्र इकाइयों को विकास पूंजी प्रदान करना है।
एमएसएमई मंत्रालय प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का कार्यान्वयन करता है, जो एक ऋण-आधारित सब्सिडी कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और ग्रामीण/शहरी बेरोजगार युवाओं की सहायता करके गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है।
मंत्री ने बताया कि पीएमईजीपी के कुल लाभार्थियों में से 39 प्रतिशत महिलाएं हैं और उन्हें गैर-विशेष श्रेणी (25 प्रतिशत तक) की तुलना में अधिक सब्सिडी (35 प्रतिशत) प्रदान की जाती है।
–आईएएनएस
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