पाकिस्तान: सिंध में 2022 की बाढ़ से क्षतिग्रस्त 14,000 स्कूलों को कायाकल्प का इंतजार

इस्लामाबाद, 26 मार्च (आईएएनएस)। लगभग साढ़े तीन साल बीत गए हैं लेकिन पाकिस्तान के सिंध प्रांत के एक दो नहीं बल्कि 14,343 विद्यालय अपने कायाकल्प का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ ने 2022 में यहां भारी तबाही मचाई थी।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 2022 की भयानक बाढ़ की चपेट में 19,808 स्कूल आए थे। इनमें से 14,343 अभी भी जीर्ण शीर्ण हाल में हैं। स्थानीय मीडिया ने आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से अव्यवस्था का खुलासा किया है।
भयानक बाढ़ में 2,268 स्कूल पूरी तरह से तबाह हो गए, जबकि 3,197 को थोड़ा नुकसान पहुंचा। पाकिस्तान के जाने-माने अखबार पाकिस्तान ऑब्जर्वर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक सरकार ने प्रांतीय, संघीय और दानकर्ता कार्यक्रम के जरिए 5,465 स्कूलों को फिर से बनाने और ठीक करने का काम शुरू कर दिया है, जिसका मतलब है कि 14,343 स्कूल अभी भी ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं।
रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान गंभीर शैक्षिक संकट का सामना कर रहा है। पहले से ही लाखों बच्चे सामाजिक, आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चरल चुनौतियों की वजह से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सिंध में बाढ़ से तबाह हुए स्कूलों को फिर से बनाने में लगातार देरी हो रही है और इससे स्थिति लगातार खराब हो रही है। नतीजतन हजारों बच्चे शिक्षा के अपने बुनियादी अधिकार से वंचित हो रहे हैं।
पाकिस्तान ऑब्जर्वर ने कहा, “यह बात बहुत चिंता की बात है कि भयानक बाढ़ को लगभग चार साल बीत चुके हैं, फिर भी ज्यादातर स्कूल खराब हालत में हैं। अब तक जितना भी पुनर्निर्माण किया गया है, वह स्थिति की मांग से बहुत कम है और इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शिक्षा किसी भी तरक्की पसंद समाज की नींव है। हर दिन जब कोई स्कूल बंद रहता है, तो उन बच्चों के लिए एक दिन बर्बाद होता है जो पहले से ही बेसिक पढ़ाई के मौकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सिंध सरकार को सभी तबाह स्कूलों को पूरा करने को तुरंत प्राथमिकता देनी चाहिए।”
पाकिस्तान में 5-16 साल की उम्र के लगभग 28 प्रतिशत बच्चे अभी भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चिंता की बात यह है कि लड़कियों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। 34 फीसदी लड़कियों का स्कूल में दाखिला नहीं हुआ है, वहीं लड़कों की ये दर 22 फीसदी है।
ये फर्क पाकिस्तान के ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखा जाता है। यहां लड़कियों को शिक्षा से दूर रखा जाता है। इससे पता चलता है कि लैंगिक असमानता शैक्षिक क्षेत्र में भी बहुत ज्यादा है।
पाकिस्तान की राष्ट्रीय साक्षरता दर 63 फीसदी है, जिसमें साक्षर पुरुषों की तादाद 73 फीसदी और महिलाओं की 52 फीसदी है।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी इलाकों में साक्षरता दर 77 फीसदी है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 56 फीसदी है। जबकि 68 फीसदी बच्चे प्राथमिक विद्यालय में दाखिला लेते हैं, लेकिन कक्षा बढ़ने के साथ यह संख्या तेजी से घट जाती है। महज 40 फीसदी मिडिल स्कूल और लगभग 30 फीसदी मैट्रिक में पढ़ते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पैसे का दबाव, घरेलू जिम्मेदारियों और प्राइमरी स्कूल के बाद पढ़ाई के कम विकल्प की वजह से बच्चे पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं। सामाजिक उम्मीदों और जल्दी शादी की वजह से लड़कियों के लिए ये चुनौतियां और बढ़ जाती हैं।
–आईएएनएस
केआर/