बुनियादी बातों व प्रवाह के आधार पर भारत एशिया में सबसे स्थिर बाजार बना हुआ है


नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। वर्तमान वित्‍तीय वर्ष की दूसरी और तीसरी तिमाही में अब तक भारत का बेहतर प्रदर्शन मजबूत आर्थिक और कॉर्पोरेट टॉप-लाइन विकास, निवेश में नीति-संचालित रिकवरी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला द्वारा जोखिम कम करने और विनिर्माण क्षेत्र में उछाल की उम्मीदों पर आधारित है। बीएनपी पारिबा में एशिया प्रशांत, इक्विटी रिसर्च के प्रमुख मनीषी राय चौधरी का कहना है कि मजबूत घरेलू प्रवाह से शेयर बाजार में तरलता को स्थिरता मिलती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल्यांकन महंगा बना हुआ है, लेकिन जोखिमों की सापेक्ष कमी के कारण इसे अभी बरकरार रखा जाना चाहिए।

एफओएमसी की कठोर टिप्पणी और बीओजे द्वारा वाईसीसी में छूट के संयोजन से अमेरिका में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 55बीपीएस की बढ़ोतरी ने यूसीडी को बढ़ावा दिया और एशियाई इक्विटी में नवजात रिकवरी के लिए भुगतान किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशियाई आय उपज और अमेरिकी बांड उपज के बीच का अंतर अपने सबसे निचले स्तर के करीब है, इसका अर्थ है कि पूर्व में मंदी की अवधि की संभावना है।

चीनी आर्थिक गति में तीव्र मंदी, लाभ प्राप्त अग्रिम पंक्ति के संपत्ति डेवलपर्स के लिए लगातार परेशानी और भारी नीतिगत प्रोत्साहन भी मदद नहीं कर रहे हैं।

इसमें कहा गया है कि एकमात्र उम्मीद की किरण कोरिया, भारत और आसियान के कुछ हिस्सों में हालिया ईपीएस-अनुमान की वसूली है।

बीएनपी पारिबा ने कहा, “हम आईटीसी के माध्यम से भारत में निवेश बढ़ाते हैं, जो अपेक्षाकृत सस्ता, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाला उपभोक्ता उत्पाद है, जिसे इसके हालिया व्यापार पुनर्गठन से लाभ होने की संभावना है।”

“हांगकांग/चीन और भारत पर हमारा अधिभार जारी है, हालांकि बाद वाले पर यह थोड़ा अधिक है। अमेरिका में मंदी की चिंताओं के बावजूद, हमारा मानना है कि स्मृति चक्र में संभावित गिरावट से कोरियाई तकनीक को समर्थन मिलना चाहिए।”

–आईएएनएस

सीबीटी


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