शिया बोर्ड ने जनसांख्यिकीय समिति का किया स्वागत, मौलाना यासूब बोले- आबादी में बदलाव की जांच जरूरी

लखनऊ, 27 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनसांख्यिकीय बदलाव पर उच्चस्तरीय समिति गठित किए जाने का ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने स्वागत किया है। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने इसे सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि देश में आबादी के पैटर्न पर नजर रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
मौलाना यासूब अब्बास ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा, “गृह मंत्री द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति एक बहुत ही सराहनीय पहल है। जनसांख्यिकीय बदलावों पर नजर रखी जानी चाहिए। आबादी कहां घट रही है, कहां बढ़ रही है और लोग किन व्यवसायों में लगे हुए हैं, इसे ट्रैक करते हुए सरकार को आबादी पर पूरी निगरानी रखनी चाहिए।”
उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से विनम्र अपील करते हुए कहा, “मैं अल्पसंख्यक शिया समुदाय से आता हूं। शिया समुदाय को वर्तमान में उसका उचित हिस्सा नहीं दिया जा रहा है।” मौलाना अब्बास ने आगे कहा कि परिवार धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए कहीं भी आबादी में अचानक उछाल या कमी दिखे तो उसकी जांच अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यह समिति देश के हित में काम करेगी और सभी समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होगी।
ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर मौलाना यासूब अब्बास ने सभी मुसलमानों से अपील की कि वे त्योहार शांति और संयम के साथ मनाएं। उन्होंने कहा, “यह ईद-उल-अजहा का त्योहार है। मैं सभी मुसलमानों से अपील करता हूं कि इस भारत में हमारे हिंदू भाई भी आपके पड़ोसी और भाई हैं। इस्लाम धर्म का आदेश है कि किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। कुर्बानी की रस्में इस तरह न निभाएं कि खून खुले में बहे, जानवरों के अवशेष खुले पड़े रहें या कचरा सार्वजनिक रास्तों पर फेंका जाए, जिससे दूसरे समुदायों को असुविधा हो।”
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले पर किसी को सवाल नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब यह मामला विवादित हो गया तो यह सुप्रीम कोर्ट में गया। अदालत ने इसकी वैधता को बरकरार रखा है। एसआईआर से संबंधित आज हुई सुनवाई के संबंध में हम अदालत के फैसले का पूरी तरह सम्मान करते हैं। अदालत का फैसला जो भी हो, वह हमें स्वीकार्य होगा।”
–आईएएनएस
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