भारत ने अफगानिस्तान के साथ शांति और विकास के प्रति दोहराई प्रतिबद्धता, पाकिस्तान पर साधा निशाना

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। भारत और अफगानिस्तान के बीच सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करते हुए, विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अफगानिस्तान और इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए नई दिल्ली की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।
नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त राष्ट्र अफगानिस्तान सहायता मिशन (यूएनएएमए) की बैठक में भारत के बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान के साथ अपने मानवीय सहयोग और विकास साझेदारी को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
जायसवाल ने कहा, “अफगानिस्तान के मामले में सोमवार को न्यूयॉर्क में एक बैठक हुई थी, जहां हमारे स्थायी प्रतिनिधि ने यूएनएएमए की ब्रीफिंग पर बयान दिया। उसमें हमने दोहराया कि भारत और अफगानिस्तान पड़ोसी देश हैं। सभ्यताओं के रूप में हमारे संबंध सदियों पुराने हैं। हम अफगानिस्तान और पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता के पक्ष में हैं, ताकि विकास को बढ़ावा मिल सके। हमने अफगानिस्तान में अपने विकास सहयोग की भी बात की, जिसमें खाद्य सुरक्षा, दवाइयां, फार्मा सपोर्ट और स्वास्थ्य क्षेत्र शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे कई विकास कार्यक्रम सभी वर्गों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इससे महिलाओं और बच्चों सहित हर वर्ग को फायदा होता है। हमने अफगान लोगों के लिए छात्रवृत्तियां और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी दिए हैं, और ये आगे भी जारी रहेंगे। आप देखेंगे कि हमने शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी है, जैसा कि रिपोर्ट और ब्रीफिंग में बताया गया था। अफगानिस्तान पर हमारा रुख वही है जो हमारे स्थायी प्रतिनिधि के बयान में दिया गया है।”
एमईए ने कहा कि भारत अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और अफगान लोगों के विकास और प्रगति के लिए काम करता रहेगा।
भारत ने सोमवार को अफगानिस्तान और संयुक्त राष्ट्र का पाकिस्तान की आलोचनाओं से बचाव किया और पाकिस्तान की ‘अमानवीय’ हिंसा की निंदा की।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ने यूएनएएमए और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट की सच्चाई पर सवाल उठाए, जो गलत है।
उन्होंने कहा, “बहुपक्षीयता और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन कोई ‘चुनिंदा मेन्यू’ नहीं है।”
उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कहा कि जो देश रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर हवाई हमले करता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता की बातें करता है, वह पाखंड का उदाहरण है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत उन रिपोर्टों से सहमत है जिनमें नागरिकों की मौत और हवाई हमलों का जिक्र है, और हम संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चिंता का समर्थन करते हैं।
भारत ने यह भी कहा कि वह यूएनएएमए की उस अपील का समर्थन करता है जिसमें जांच की बात की गई है, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके, दोबारा ऐसी घटनाएं न हों और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
–आईएएनएस
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