रूस पर दबाव बढ़ाने की तैयारी, ईयू ने 21वें प्रतिबंध पैकेज का किया ऐलान


ब्रुसेल्स, 9 जून (आईएएनएस)। यूरोपीय आयोग ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का 21वें पैकेज प्रस्तावित किया है। इसका लक्ष्य ऊर्जा, वित्तीय सेवाएं और क्रिप्टो, व्यापार और पहली बार मत्स्य पालन जैसे अहम सेक्टर हैं। यह जानकारी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को दी।

आयोग के बयान के अनुसार, प्रस्तावित कदमों में तेल की कीमत सीमा को लेकर अपने-आप होने वाले समायोजन को अगले जनवरी तक रोकना शामिल है। इसका मकसद तेल बाजार को स्थिर रखना है, लेकिन साथ ही रूस की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव बनाए रखना भी है।

प्रतिबंध सूची में 30 और जहाज जोड़े जाएंगे। पहले से ही 632 जहाजों पर पाबंदी लगी हुई है। पहली बार ऐसे जहाजों को भी निशाना बनाया जाएगा जो रूस के ‘शैडो फ्लीट’ को सपोर्ट सेवाएं देते हैं।

इसके अलावा, ऐसे बंदरगाहों, हवाई अड्डों और रिफाइनरियों पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है जो रूसी तेल के व्यापार या प्रोसेसिंग में शामिल हैं। रूस को एलएनजी टैंकर बेचने पर भी पाबंदी लगाई जाएगी।

वित्तीय और क्रिप्टो से जुड़े कदमों के तहत, 31 और रूसी बैंकों पर ट्रांजेक्शन बैन लगाने की बात है। साथ ही 20 और बैंक, क्रिप्टो कंपनियां, प्लेटफॉर्म और तेल व्यापारियों पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जो तीसरे देशों में मौजूद हैं।

व्यापार के क्षेत्र में इस पैकेज में रूस के सैन्य-औद्योगिक सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले सामान और तकनीक के निर्यात पर नए प्रतिबंध शामिल हैं। इसमें ड्रोन से जुड़ा उपकरण भी शामिल है।

आयोग ने रूस से आने वाले लगभग 6 करोड़ यूरो (करीब 6.94 करोड़ अमेरिकी डॉलर) के सामान के आयात पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें कुछ धातुएं और ऑटोमोबाइल पार्ट्स शामिल हैं, ताकि रूस पर निर्भरता कम की जा सके।

पहली बार, यूरोपीय संघ रूस के मत्स्य पालन सेक्टर को भी निशाना बनाएगा। इसके तहत कुछ मछली उत्पादों के आयात पर कड़े प्रतिबंध और कुछ पर पूरी तरह से बैन लगाने का प्रस्ताव है, जिसमें कॉड मछली भी शामिल है।

वॉन डेर लेयेन ने यह भी कहा कि इस पैकेज के तहत एक नया कदम यह होगा कि जिन लोगों ने यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से रूसी सेना में सेवा दी है, उन्हें यूरोपीय संघ में प्रवेश करने से रोका जाएगा।

हालांकि, यह प्रस्ताव अभी लागू नहीं हुआ है। इसे लागू होने के लिए सभी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की मंजूरी जरूरी है।

–आईएएनएस

एवाई/डीकेपी


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