दिल्ली विधानसभा में उठी ‘नजफगढ़’ का नाम बदलने की मांग
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नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा में गुरुवार को सत्तारूढ़ भाजपा के विधायकों ने नजफगढ़ का नाम बदलने की मांग की। साथ ही, सदन के बाहर भाजपा नेताओं ने विपक्षी आम आदमी पार्टी पर झूठ की राजनीति करने का आरोप लगाया।
भाजपा विधायक नीलम पहलवान ने विधानसभा में नजफगढ़ का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इसे नाहरगढ़ का नया नाम देने की मांग की है।
नीलम पहलवान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, “नजफगढ़ का प्राचीन इतिहास रहा है। बादशाह आलम शाह ने नजफगढ़ की जनता पर बहुत सारे अत्याचार किए थे। उन्होंने हिंदुओं का कत्लेआम किया और हमारी विरासत तथा धरोहर को चकनाचूर कर दिया था। आज नजफगढ़ की जनता ने मुझे इस मुकाम पर पहुंचाया है कि मैं जनता की आवाज को सदन में रख सकूं।”
उन्होंने आम आदमी पार्टी को “फटा ढोल” बताते हुए कहा कि उसे सिर्फ बजने से मतलब है, कोई काम नहीं है। वे क्या बोलते हैं, मुझे इससे कोई मतलब नहीं है। मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि नजफगढ़ की जनता की उम्मीदों पर खरी उतरूं।”
आरके पुरम विधानसभा से भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने भी मीडिया से बात करते हुए मोहम्मदपुर गांव का नाम माधवपुरा करने की मांग की। उन्होंने आईएएनएस से कहा, “गांव का नाम मोहम्मदपुर है और वह आरके पुरम विधानसभा में ही आता है। मैं आने वाले समय में विधानसभा में स्पीकर से मांग करूंगा कि गांव का नाम बदलकर माधवपुरा किया जाए, क्योंकि यही क्षेत्र के लोगों की इच्छा है। अगर जनता चाहेगी तो उसे करना हमारा फर्ज है।”
उन्होंने कहा, “इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया और महाकुंभ में 60 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने वहां जाकर स्नान किया। उत्तर प्रदेश कितनी तरक्की कर रहा है, यह सब देख रहे हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या नाम बदलने से वहां की तरक्की नहीं हो रही है? पीएम मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में भी विकास होगा।”
कैलाश गहलोत ने भी नजफगढ़ का नाम बदलने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “नजफगढ़ के लोगों की अहम भूमिका रही और मैं नाम बदलने की मांग का पूरा समर्थन करता हूं। मैं आम आदमी पार्टी को बताना चाहूंगा कि वह झूठ की राजनीति बंद करे, क्योंकि दिल्ली की जनता ने उन्हें ठुकरा दिया है। मुझे ऐसा लगता है कि पंजाब के लोग भी दिल्ली की तरह उन्हें जवाब देंगे।”
भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय ने आईएएनएस से कहा, “अहंकारवादी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने 11 साल तक सदन को तानाशाही तरीके से चलाया, जो सभी लोगों ने देखा है। वह आज हमें तानाशाह कह रहे हैं, जिन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर की भावना को इस सदन में तार-तार किया है। मैं उनके विधायकों से कहूंगा कि वह एक बार मुख्यमंत्री के कमरे में जाकर देखें कि बाबा साहेब और भगत सिंह की तस्वीरें लगी हुई हैं। सिर्फ हंगामा करना और राजनीतिक रोटियां सेंकना, यही उनका मकसद है।”
भाजपा विधायक ओ.पी. शर्मा ने दिल्ली विधानसभा में सीसीटीवी कैमरा घोटाले का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “सीसीटीवी कैमरा घोटाला एक बड़ा घोटाला है। हर विधानसभा में चार हजार सीसीटीवी कैमरे लगने थे। मेरी विधानसभा में पहले फेस में लगने वाले दो हजार कैमरे लगाए जाने थे। दिल्ली सरकार ने इसकी पेमेंट भी कर दी थी, लेकिन इसे नहीं लगाया गया। मैंने इस मुद्दे को सदन में उठाया और इसकी जांच की मांग की है, ताकि मेरे विधानसभा क्षेत्र में चार हजार कैमरे लगाए जा सकें।”
आम आदमी पार्टी के विधायकों ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधा। ‘आप’ विधायक अनिल झा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “शासन को निरंकुश बनाने का तरीका भाजपा ने पिछले 10-15 साल में सीख लिया है। जहां इनकी सरकारें नहीं हैं, वहां विपक्ष को तोड़ना है और जिस राज्य में विपक्ष है, उसे मानना नहीं है। मैं पूछना चाहता हूं कि आप विपक्ष को विधानसभा से बाहर क्यों कर रहे हो। विपक्ष को सदन से बाहर किया जा सकता है, लेकिन विधानसभा से नहीं। हमें इसलिए बाहर किया गया, क्योंकि हमने बाबा साहेब और भगत सिंह की तस्वीरों को हटाने का मुद्दा उठाया था।”
‘आप’ विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी दिल्ली सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मैं सदन में कैग की रिपोर्ट पर अपनी बात रखूंगा। साथ ही यह बताऊंगा कि खुद वर्तमान स्पीकर हमारी सरकार के दौरान टेबल पर खड़े होते थे, लेकिन कभी हमारी सरकार ने उन्हें विधानसभा के परिसर से बाहर नहीं किया, जैसा इन्होंने अब हमारे साथ किया है। हमारी पार्टी के 22 विधायक हैं और इनके (भाजपा) के कभी तीन तो कभी आठ विधायक भी रहे हैं। हमने हमेशा मर्यादा का ख्याल रखा है और वह जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह ठीक नहीं है।”
आम आदमी पार्टी के नेता आदिल अहमद खान ने आईएएनएस से कहा, “हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि चुने हुए विधायकों को विधानसभा के परिसर में घुसने नहीं दिया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष का फोन स्पीकर साहब नहीं उठा रहे हैं और उन्होंने सिर्फ मौखिक रूप से आदेश दिया है। हमारे विधायकों के साथ ऐसा करना शर्मनाक है। भाजपा संविधान को नहीं मानती है और न ही बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर पर यकीन करती है। बाबा साहेब और भगत सिंह की तस्वीर हटाकर भाजपा ने शर्मनाक काम किया है। हमारी यही मांग है कि बाबा साहेब और भगत सिंह की तस्वीर को उसी जगह पर लगाया जाए, जहां वह पहले लगी हुई थी।”
–आईएएनएस
एफएम/