बलबीर सिंह: भारतीय हॉकी के स्वर्णिम दौर के बड़े नाम, लगातार तीन ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिलाने में रहा यादगार योगदान


नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। बलबीर सिंह का नाम भारतीय हॉकी के महानतम खिलाड़ियों में शुमार किया जाता है। वह उस दौर का बड़ा चेहरा रहे, जिस दौर का भारतीय हॉकी के स्वर्णिम दौर के नाम से जाना जाता है। बलबीर सिंह ने भारतीय हॉकी टीम को लगातार तीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

बलबीर सिंह का जन्म 10 अक्टूबर 1924 को हरिपुर, पंजाब में हुआ था। उन्हें बलबीर सिंह सीनियर के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने पांच साल की उम्र से हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। हॉकी की शुरुआत उन्होंने एक गोलकीपर के तौर पर की और फिर बैक फोर में खेलने लगे। जब उन्हें स्ट्राइकर के तौर पर खेलने का मौका मिला, उसके बाद उनके खेल में रवानी आई और काफी तेजी से वह राष्ट्रीय फलक पर उभरे।

बलबीर सिंह ने 1946 और 1947 में लगातार दो बार पंजाब को हॉकी में राष्ट्रीय पदक दिलाया। 1946 से पहले लगातार 14 साल तक पंजाब को इस खिताब का इंतजार था। पंजाब के लिए किए गए प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय टीम में उनके लिए जगह बनी।

भारतीय हॉकी के सबसे बेहतरीन सेंटर-फॉरवर्ड खिलाड़ी माने गए बलबीर सिंह ने 1948 (लंदन ओलंपिक), 1952 (हेलिंस्की ओलंपिक), और 1956 में मेलबर्न ओलंपिक में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में असाधारण योगदान दिया था। उन्होंने लंदन ओलंपिक में 8 और हेलिंस्की ओलंपिक में 9 गोल किए। लंदन ओलंपिक फाइनल में उन्होंने 2 गोल किए थे। हेलिंस्की ओलंपिक में भारत का फाइनल नीदरलैंड से था। फाइनल में पांच गोल करते हुए बलबीर ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था। यह अभी भी एक ओलंपिक पुरुष हॉकी फाइनल में किसी खिलाड़ी द्वारा किए गए सबसे अधिक गोल के रिकॉर्ड के रूप में दर्ज है। भारत ने यह मुकाबला 6-1 से जीता था। सेमीफाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ उन्होंने हैट्रिक लगाई थी। 1956 में भारतीय टीम पाकिस्तान को हराकर गोल्ड जीती थी। इस मैच में वह हाथ में इंजरी के साथ खेले थे। 1958 में एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी वे हिस्सा रहे थे।

बलबीर सिंह ने 1960 में हॉकी को अलविदा कह दिया था। संन्यास के बाद वह टीम के साथ कोच, मैनेजर और चयनकर्ता के रूप में भी जुड़े थे। बलबीर सिंह के जीवन पर ‘गोल्ड’ नाम की फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें अक्षय कुमार ने अभिनय किया था। 1957 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। बलबीर सिंह का निधन 25 मई 2020 को हुआ था।

–आईएएनएस

पीएके


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