वैश्विक शांति प्रयासों के बीच पाकिस्तान घरेलू संकटों से घिरा, आर्थिक बदहाली और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा देश

इस्लामाबाद, 24 मई (आईएएनएस)। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय “मध्यस्थ” की छवि को लेकर सवाल उठते रहे हैं। एक ओर वह खुद को शांति-स्थापक के रूप में वैश्विक भूमिका दिलाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर कई गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं।
बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की घरेलू अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। साथ ही बलूचिस्तान में आंतरिक संघर्ष और अशांति तथा भारत और अफगानिस्तान के साथ सीमा पार झड़पें भी देश की स्थिरता के लिए लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल (जिसमें सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी शामिल थे) ने शुक्रवार को ईरान का दौरा किया। इस यात्रा का उद्देश्य वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त कराने के प्रयासों को आगे बढ़ाना बताया गया। इस बीच ढाका ट्रिब्यून में लिखे एक संपादकीय में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
संपादकीय में कहा गया है कि पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से ऋण के बिना अपनी अर्थव्यवस्था को चलाना लगभग असंभव हो गया है। विदेशी मुद्रा भंडार बार-बार इतने नीचे आ जाते हैं कि आयात खर्च पूरा करना भी मुश्किल हो जाता है। ईंधन की कमी, बिजली दरों में वृद्धि और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम नागरिकों का जीवन कठिन बना दिया है।
मध्यम वर्ग खर्चों में कटौती करने को मजबूर है, छोटे व्यवसाय संघर्ष कर रहे हैं और बड़ी संख्या में युवा विदेश पलायन की कोशिश कर रहे हैं। संपादकीय में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंधों को लगातार अस्थिर बताया गया है, जिसमें सीमा संघर्ष, आतंकवाद और तालिबान से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
भारत के साथ संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि कश्मीर मुद्दा, सीमा झड़पें और राजनीतिक तनाव दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बनाए रखते हैं। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि परमाणु संघर्ष की आशंका तक चर्चा में आ जाती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठन पाकिस्तान में कई बड़े हमले कर चुके हैं, जिससे सुरक्षा स्थिति और जटिल हो गई है।
संपादकीय के अनुसार, पाकिस्तान का अमेरिका-ईरान संघर्ष में मध्यस्थता का प्रयास उसके अपने हितों से भी जुड़ा है, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और प्रभावित होगी। साथ ही, ईरान को लेकर आंतरिक सांप्रदायिक तनाव की आशंका भी जताई गई है।
–आईएएनएस
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