दक्षिण कोरिया में 'बैलेट पेपर' मामले ने पकड़ा तूल, पीएम बोले 'मताधिकार लोकतंत्र की नींव'


सोल, 9 जून (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया में हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों के दौरान मतपत्र की भारी कमी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बड़ी संख्या में युवा सड़क पर उतर आए हैं। इस घटना पर अब प्रधानमंत्री किम मिन-सोक ने गंभीर चिंता जताई है और इसे लोकतंत्र की बुनियादी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला मामला बताया है।

मंगलवार को युवाओं से जुड़ी एक नीति बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा, “सरकार को इस तरह की समस्या के प्रति अधिक सतर्क रहना चाहिए था और तेजी से समाधान करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।”

उन्होंने इस घटना को “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की और कहा कि इससे सरकार की जवाबदेही और बढ़ गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 जून को हुए चुनावों के दौरान सोल सहित देशभर के करीब 26 मतदान केंद्रों पर बैलेट पेपर की कमी के कारण मतदान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। दक्षिण कोरिया के चुनावी इतिहास में इस तरह की घटना को बेहद असामान्य माना जा रहा है।

इस घटना के बाद जनता में नाराजगी बढ़ गई है। खासकर 20 और 30 वर्ष की आयु के युवाओं ने सोल के जामसिल इलाके में मतगणना स्थल के पास लगातार प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। ये कई दिनों से जारी हैं।

वहीं, राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने व्यापक जांच के आदेश दिए और कहा, “यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकार, यानी मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।”

राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग को लेकर जनता का भरोसा कमजोर होने पर भी चिंता जताई।

उन्होंने संसद से भी इस मामले की संसदीय जांच शुरू करने का आग्रह किया है ताकि पूरी घटना की सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोका जा सके। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर भी जांच टीम गठित की जाएगी, जिसमें पुलिस और अभियोजन अधिकारी शामिल होंगे।

फिलहाल सरकार और चुनाव आयोग दोनों ही बढ़ते जनदबाव और राजनीतिक आलोचना का सामना कर रहे हैं, जबकि यह मामला दक्षिण कोरिया में चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता और तैयारी को लेकर गंभीर बहस का विषय बन गया है।

–आईएएनएस

केआर/


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