पीओके में नरसंहार और दमन पर जेएसएमएम प्रमुख ने भारत समेत अन्य देशों से की हस्तक्षेप की मांग


बर्लिन, 9 जून (आईएएनएस)। जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) के चेयरमैन शफी बुरफत ने भारत और दुनियाभर के लोगों से अपील की है कि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके), सिंध और दूसरे इलाकों के लोगों पर पाकिस्तानी सेना की ओर से की जा रही क्रूरता और फासीवाद के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं। बुरफत ने पीओके में रहने वाले लोगों की आजादी और सम्मान की लड़ाई में उनका साथ देने की अपील भारत समेत तमाम देशों से की है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने सोमवार को एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 7 जून को पीओके के रावलकोट इलाके में पुलिस और नए बैन किए गए जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में सात आम लोगों के मारे जाने के बाद उनकी यह बात आई।

बुरफत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “हम पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बेगुनाह लोगों के खिलाफ की गई खुली क्रूरता, फासीवाद और अपराध की कड़ी निंदा करते हैं। हम न केवल इन अपराधों की कड़ी निंदा करते हैं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र, भारत, यूरोप, ब्रिटेन, मिडिल ईस्ट, ईस्ट एशिया, अफ्रीका, मध्य एशिया और दुनिया के सभी सभ्य देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन से भी अपील करते हैं कि वे पीओके में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे नरसंहार, मानवाधिकार के उल्लंघन और सरकार द्वारा प्रायोजित जुल्म पर तुरंत ध्यान दें।”

सिंधी नेता ने पाकिस्तानी मिलिट्री पर पूरे पीओके में आम लोगों के खिलाफ दमन और खून-खराबे का कैंपेन चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इसलिए, हम खास तौर पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और अपने पड़ोसी देश भारत और दुनियाभर की अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और लोकतांत्रिक सरकारों से अपील करते हैं कि वे दखल दें और पाकिस्तान के जुल्म, कब्जे, गुलामी और फासीवादी राज से बचाने में मदद करें।”

बुरफत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी मिलिट्री खुले तानाशाही, फासीवाद और क्रूरता की गहराई में उतर गई है।

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान जैसा कृत्रिम राज्य छल, दमन और धर्म के राजनीतिक दुरुपयोग के जरिए सिंधियों, पीओकेके लोगों, पश्तूनों, सराइकी, बलोच और ब्राहुई जैसे ऐतिहासिक समुदायों पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है।”

बुरफत ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान सरकार द्वारा प्रायोजित आतंकवाद, फासीवाद और क्रूरता का सामना न करने से न केवल इस क्षेत्र के लोगों को खतरा होगा, बल्कि यह दुनिया की शांति, सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक खुशहाली के लिए भी बढ़ता खतरा पैदा करेगा।

उन्होंनेकहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस तरह के सुनियोजित दमन के सामने चुप नहीं रह सकता। समय आ गया है कि दुनिया पाकिस्तान के शासन के अधीन उत्पीड़ित समुदायों की वास्तविक स्थिति को स्वीकार करे और न्याय, स्वतंत्रता, मानवाधिकारों तथा आत्मनिर्णय के सार्वभौमिक सिद्धांत के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो।

–आईएएनएस

केके/वीसी


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