ऊर्जा संकट के बीच नॉर्डिक निवेशकों ने ईयू से आर्कटिक ड्रिलिंग बैन बनाए रखने की अपील की


कोपेनहेगन, 27 मई (आईएएनएस)। नॉर्डिक देशों के निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के एक समूह ने यूरोपीय संघ (ईयू) से अपील की है कि वह आर्कटिक क्षेत्र में नए तेल और गैस ड्रिलिंग पर प्रतिबंध लगाए रखे।

नॉर्डिया एसेट मैनेजमेंट सहित 11 से अधिक वित्तीय संस्थानों और संगठनों ने यूरोपीय आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि आर्कटिक में नए जीवाश्म ईंधन प्रोजेक्ट्स शुरू करना न तो मौजूदा ऊर्जा संकट का त्वरित समाधान है और न ही दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सही कदम।

उनका तर्क है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को शुरू होने में कई साल लग जाते हैं, जबकि यूरोप अभी ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति दबाव से जूझ रहा है। इसलिए आर्कटिक ड्रिलिंग का विस्तार मौजूदा संकट को हल करने के बजाय पर्यावरण के लिए और जोखिम बढ़ा सकता है।

निवेशकों ने चेतावनी दीकि आर्कटिक जैसे संवेदनशील और नाजुक पारिस्थितिक तंत्र में तेल-गैस उत्खनन से गंभीर पर्यावरणीय नुकसान और तेल रिसाव का खतरा बढ़ सकता है, जो तय किए गए ग्लोबल क्लाइमेट टारगेट के लिए भी सही नहीं है।

ये अपील ऐसे दौर में की गई है जब ऊर्जा संकट के बीच कुछ देश आर्कटिक संसाधनों से विकल्प तलाशन की वकालत कर रहे हैं। फिलहाल ईयू अपनी आर्कटिक नीति की समीक्षा कर रहा है और अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

नॉर्डिक देशों के वित्तीय संस्थानों और निवेशकों ने यूरोपीय संघ (ईयू) से अपील की है कि वह आर्कटिक क्षेत्र में नए तेल और गैस ड्रिलिंग के खिलाफ अपना रुख बनाए रखे, जबकि ईरान में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के चलते ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

एक प्रवक्ता ने बताया कि बदलते भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक हालात को देखते हुए ईयू अपनी आर्कटिक नीति की समीक्षा कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।

नॉर्डिया एसेट मैनेजमेंट ने बुधवार को कहा कि आर्कटिक पृथ्वी के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है और यहां दुर्लभ जीव पाए जाते हैं।

रॉयटर्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, संस्थान ने चेतावनी दी कि तेल और गैस का और विस्तार इन नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, जिससे तेल रिसाव और प्रदूषण का खतरा और बढ़ जाएगा।

नॉर्वे, जो यूरोप का सबसे बड़ा गैस आपूर्तिकर्ता है लेकिन यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, ब्रसेल्स पर आर्कटिक में ड्रिलिंग पर लगे प्रतिबंध को हटाने का दबाव बना रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई पुराने तेल और गैस क्षेत्रों के कारण 2030 के दशक में नॉर्वे का उत्पादन घट सकता है, जब तक कि इक्विनोर जैसी कंपनियां नए क्षेत्रों की खोज नहीं करतीं।

–आईएएनएस

केआर/


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