भारत के फार्मा सेक्टर में 2024 में विनियामक उल्लंघनों में 11 प्रतिशत की गिरावट हुई दर्ज
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नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में 2024 में विनियामक उल्लंघन के मामलों में 11 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई है। एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
विनियामक उल्लंघन के मामले, जिनमें यूएस ड्रग रेगुलेटर द्वारा ऑफिशियल एक्शन इंडीकेटेड (ओएआई) टैग शामिल है, 2014 में 23 प्रतिशत थे। यह गिरावट बताती है कि देश की फार्मा इंडस्ट्री ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अनुपालन में सुधार किया है।
वैश्विक स्तर पर, 2014 में ओएआई स्टेटस का हिस्सा 6 प्रतिशत था और अब यह दोगुना से अधिक होकर 14 प्रतिशत हो गया है।
भारतीय फार्मास्युटिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के निरीक्षणों की कुल संख्या वैश्विक स्तर पर घटी है, जो 2014 में सालाना लगभग 1,849 से घटकर 2024 में लगभग 940 हो गई है, जबकि भारत का हिस्सा बढ़ गया है।
इस बीच, एक अन्य हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि देश का दवा निर्यात 2023 में लगभग 27 बिलियन डॉलर से दोगुना होकर 2030 तक 65 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। फार्मा इंडस्ट्री 2047 तक अनुमानित 350 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकती है।
भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा सप्लायर है, जो दुनिया भर में बिकने वाली पांच में से एक जेनेरिक दवा का उत्पादन करता है, देश वर्तमान में निर्यात मूल्य के मामले में 11वें स्थान पर है।
बेन एंड कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने विशेष जेनेरिक, बायोसिमिलर और इनोवेटिव प्रोडक्ट को अपनी निर्यात बास्केट में शामिल कर इसे इनोवेट और डायवर्सिफाई किया है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत 2047 तक निर्यात मूल्य में टॉप पांच देशों में कैसे स्थान प्राप्त कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में 0.8 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय बायोसिमिलर निर्यात के भी 2030 तक 5 गुना बढ़कर 4.2 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जो वैश्विक बाजार का 4 प्रतिशत हिस्सा होगा और 2047 तक 30-35 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।
भारत का फार्मा निर्यात 70 प्रतिशत है और इसका मूल्य 19 बिलियन डॉलर है, जिसके 2047 तक बढ़कर 180-190 बिलियन डॉलर हो जाने का अनुमान है।
–आईएएनएस
एसकेटी/एएस